Ashtavakra Mahageeta Bhag-I: Mukti Ki Aakansha (अष्टावक्र महागीता भाग-1: मुक्ति की आ
By Osho
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तम मझ जब सन त ऐस सन जस कई कस गयक क सनत ह। तम मझ ऐस सन जस कई कस कव क सनत ह। तम मझ ऐस सन क जस कई कभ पकषय क गत क सनत ह, य पन क मरमर क सनत ह, य वरष म गरजत मघ क सनत ह। तम मझ ऐस सन क तम उसम अपन हसब मत रख। तम आनद क लए सन। तम रस म डब। तम यह दकनदर क तरह मत आओ। तम यह बठ-बठ भतर गणत मत बठओ क कय इसम स चन ल और कय कर, कय न कर। तम मझ सरफ आनद-भव स सन। सवनत सखय तलस रघनथ गथ! सवनत सखय... सख क लए सन। उस सख म सनतसनत ज चज तमह गदगद कर जए, उसम फर थड और डबक लगओ। मर गत सन, उसम ज कड तमह भ जए, फर तम उस गनगनओ; उस तमहर म...






















