Rajiv Gandhi Ke Sapno Ka Bharat (राजीव गांधी के सपनों का भारत)
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जहां दूसरे लोग देश को एक जड़ वस्तु, कुछ मैदान, जंगल, पहाड़ और नदी समझते हैं, वहां मैं अपने देश को अपनी माता मानता हूं। मैं उसकी पूजा करता हूं और मां की भांति उसकी भक्ति करता हूं। जब कोई राक्षस मां की छाती पर बैठ कर उसका खून चूस रहा हो तो उस समय उसका पुत्र क्या करेगा ? क्या वह चुपचाप अपने खान-पान में लगा रहेगा और अपने परिवार के साथ मौज मनाता रहेगा? या इसके बदले में मां को बचाने के लिए दौड़ पड़ेगा ? मैं जानता हूं कि इस पतित जाति को उठा सकने की सामर्थ्य मुझमें है। यह कोई शारीरिक सामर्थ्य नहीं,...






















