Yadon Ki Baraat
Paperback
$14.99
Premium Members save an extra 10% and all Members collect stamps to save with Rewards. 10 stamps = $5.Learn More
Select a store to view item availability.
साफ़ और सीधी बात कहने वाले, जोश मलीहाबादी ने अपनी आत्मकथा उतनी ही साफ़गोई से बयां की है जितने वे खुद थे। 1898 में अविभाजित भारत में मलीहाबाद के यूनाइटिड प्राविन्स में एक साहित्यिक परिवार में उनका जन्म हुआ और नाम रखा गया, शब्बीर हसन खान। जब उन्होंने शायरी करनी शुरू की तो अपना नाम जोश मलीहाबादी रख लिया। जोशीले तो वे थे ही और सोच भी शुरू से ही सत्ता-विरोधी थी। 'हुस्न और इंकलाब' नज़्म के बाद उन्हें 'शायर-ए-इंकलाब' कहा जाने लगा। 1925 में उस्मानिया विश्वविद्यालय में जब वे काम करते थे, तो उन्होंने ह...






















