Sahaj Yog, Bhag - 2: (सहज योग, भाग - 2)
By Osho
Hardcover
$38.99
By Osho
Premium Members save an extra 10% and all Members collect stamps to save with Rewards. 10 stamps = $5.Learn More
Select a store to view item availability.
सरहपा और तिलोपा क्रियाकांड और अनुष्ठान को धर्म नहीं कहते। तुम पूछते होः 'कृपया बताएं कि उनके अनुसार धर्म क्या है?'
वैसा चैतन्य, जिसमें न कोई क्रियाकांड है, न कोई अनुष्ठान है, न कोई विचार है, न कोई धारणा है, न कोई सिद्धांत है, न कोई शास्त्र है। वैसा दर्पण, जिसमें कोई प्रतिछवि नहीं बन रही--न स्त्री की, न पुरुष की, न वृक्षों की, न पशुओं की, न पक्षियों की। कोरा दर्पण, कोरा कागज, कोरा चित्त...वह कोरापन धर्म है। उस कोरेपन का नाम ध्यान है। उस कोरेपन की परम अनुभूति समाधि है। और जिसने उस कोरेपन को जा...
वैसा चैतन्य, जिसमें न कोई क्रियाकांड है, न कोई अनुष्ठान है, न कोई विचार है, न कोई धारणा है, न कोई सिद्धांत है, न कोई शास्त्र है। वैसा दर्पण, जिसमें कोई प्रतिछवि नहीं बन रही--न स्त्री की, न पुरुष की, न वृक्षों की, न पशुओं की, न पक्षियों की। कोरा दर्पण, कोरा कागज, कोरा चित्त...वह कोरापन धर्म है। उस कोरेपन का नाम ध्यान है। उस कोरेपन की परम अनुभूति समाधि है। और जिसने उस कोरेपन को जा...

















![Zen and the Art of Motorcycle Maintenance [50th Anniversary Edition]: An Inquiry into Values](https://cdn.shopify.com/s/files/1/0674/5433/7265/files/9780063342330_p0.jpg?v=1765252881&width=100&height=151&crop=center)




